Sunday, April 26
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विक्रमादित्य सिंह ने भारत सरकार से 5400 करोड़ रुपये केन्द्रीय हिस्सेदारी के रूप में प्रदान करने का आग्रह किया

लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने शनिवार देर सायं नई दिल्ली में भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित बैठक में भाग लिया। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शहरी चुनौती कोष पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में मजबूत अधोसंरचना के निर्माण के दृष्टिगत राज्य सरकार ने शहरी चुनौती कोष के तहत लगभग 5 हज़ार 400 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की हैं। उन्होंने छोटे शहरी स्थानीय निकायों और उनकी सीमित राजस्व क्षमता के दृष्टिगत राज्य के लिए 1,350 करोड़ रुपये केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में निर्धारित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और कम व्यावसायिक लाभ के कारण पुनर्विकास परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित रहती है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए शहरी चुनौती कोष में विशेष छूट देने का आग्रह भी किया।
शहरी विकास मंत्री ने निर्धारित जनसंख्या मानदंडों में उचित छूट देने और फंडिंग पैटर्न में बदलाव करने का बल दिया। उन्होंने परियोजना लागत के 50 प्रतिशत को बॉन्ड, बैंक ऋण या पीपीपी के माध्यम से जुटाने की अनिवार्यता को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने सीमित वित्तीय क्षमता और निजी निवेश की कमी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सहायता का अनुपात बढ़ाने या वायबिलिटी गैप फंडिंग देने का आग्रह किया।
विक्रमादित्य सिंह ने शहरी चुनौती कोष के अंतर्गत केंद्र सरकार से राज्य के लिए संसाधन जुटाने में सहायता, संस्थागत वित्त तक पहुंच और नवीन वित्तीय तंत्र विकसित करने में सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने निजी निवेश को आकर्षित करने और विश्वसनीय डेवलपर्स को जोड़ने के लिए नीतिगत सहयोग और मार्गदर्शन करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र पहाड़ी है और करीब 67 प्रतिशत वन क्षेत्र है, जिस कारण विकास गतिविधियों के लिए भूमि सीमित है। इसलिए हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य के लिए यह फंड अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। प्रदेश की संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के दृष्टिगत सुनियोजित शहरीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शहरी चुनौती कोष केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि सतत विकास का एक सशक्त माध्यम है। इस कोष की पर्यटन को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन और जीवन स्तर सुधार में महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
शहरी विकास मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शहरी चुनौती कोष के तहत पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत पर्यटन-आधारित शहरी परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया है, जिनमें शहरों के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों का पुनर्विकास, स्मार्ट पार्किंग, स्काईवॉक और हेरिटेज सौंदर्यीकरण शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी शहरों के लिए हाइड्रोलिक पार्किंग, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी विशेष सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। पारंपरिक बाजारों के आधुनिकीकरण, सुरक्षा सुधार और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाएं बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भूमिगत यूटिलिटी डक्ट विभिन्न प्रकार की सेवाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के साथ-साथ शहरों की सुंदरता बढ़ाने में सहायक होगी।
राज्य सरकार ने स्काइवॉक सहित एक इंटीग्रेटेड वेलनेस इको-टूरिज्म सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव भी दिया है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री से योजनाबद्ध टाउनशिप विकसित करने के लिए भी सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया, जिससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित हांेगे और शहरों पर दबाव कम होगा।
शहरी विकास मंत्री ने कहा कि शहरी प्रशासन को मजबूत करने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जो आपदा प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और नागरिक सेवाओं में मददगार साबित होंगे।
उन्होंने कहा कि क्लस्टर आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश से 1100दृ1200 करोड़ रुपये की प्राथमिकता वाली परियोजनाएं प्रस्तुत करने को कहा है, जिसमें 25 प्रतिशत राशि केंद्रीय सहायता के रूप में दी जाएगी और शेष राशि राज्य को पीपीपी या वित्तीय संस्थानों से जुटानी होगी।
बैठक में निदेशक शहरी विकास डॉ. नीरज कुमार भी उपस्थित थे।