Monday, June 29
Shadow

जिला मंडी में रेशम उद्योग बना ग्रामीण समृद्धि का आधार, हजारों किसानों की आय बढ़ाने में निभा रहा अहम भूमिका

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के ‘सुक्खू सरकार’ के प्रयास धरातल पर नजर आ रहे हैं। सरकार के प्रोत्साहन एवं किसानों की मेहनत से मंडी जिला रेशम उत्पादन के क्षेत्र में एक विशेष पहचान बना चुका है। शहतूत आधारित रेशम उत्पादन से लेकर बीज उत्पादन, पोस्ट-कोकून गतिविधियों और ओक टसर रेशम पालन तक, मंडी जिले में रेशम उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित हो चुकी है। इससे यह क्षेत्र ग्रामीण रोजगार और आजीविका संवर्द्धन का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान जिले में 3,619 औंस रेशम बीज वितरित किए गए, जिससे 6,593 किसान लाभान्वित हुए। इस अवधि में 27,041.74 किलोग्राम हरे कोकून का उत्पादन हुआ तथा किसानों को 84,500 उन्नत किस्म के शहतूत पौधे उपलब्ध करवाए गए। यह उपलब्धि रेशम उद्योग के प्रति किसानों के बढ़ते विश्वास और विभागीय प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।

वर्तमान में जिला के 1944 किसान परिवार सेरीकल्चर गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। राज्य उत्प्रेरक विकास कार्यक्रम तथा सिल्क समग्र-2 जैसी योजनाओं ने भी रेशम उद्योग को नई गति प्रदान की है। वर्ष 2025-26 में सिल्क समग्र-2 योजना के अंतर्गत जिले के 105 लाभार्थियों को 163.66 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई। इस सहायता से किसानों को शहतूत रोपण, रेशम कीट पालन गृह, उपकरण तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं।

जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने भी रेशम उद्योग के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक रेशम पालन, रोग प्रबंधन, पौधारोपण, स्वच्छता और गुणवत्तापूर्ण कोकून उत्पादन की जानकारी दी गई।

जिले के मध्य एवं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ओक टसर रेशम पालन की संभावनाएं भी तेजी से विकसित हो रही हैं। वन आधारित इस गतिविधि से ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है। विशेष रूप से वन क्षेत्रों से जुड़े परिवारों के लिए यह रोजगार का एक प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है।

रेशम कीट पालन (सेरीकल्चर) शुरू करने के लिए किसान के पास हिमाचल प्रदेश का स्थाई निवासी (बोनाफाइड सर्टिफिकेट) होना चाहिए। किसान के पास उपयुक्त कृषि-जलवायु परिस्थितियों जैसे शहतूत के पेड़ उगाने के लिए भूमि का होना और उद्योग विभाग के रेशम मण्डल से पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।

उद्योग विभाग के अंतर्गत मंडी जिले में चार प्रमुख संस्थान रेशम मण्डल मंडी, उप निदेशक रेशम कार्यालय बालीचौकी, सिल्कवर्म सीड प्रोडक्शन सेंटर (एसएसपीसी) थुनाग तथा रेशम मण्डल संधोल रेशम गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनके माध्यम से किसानों को पौधारोपण, रेशम कीट पालन, तकनीकी प्रशिक्षण, बीज उपलब्धता, विपणन तथा मूल्य संवर्द्धन जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। मंडी रेशम मण्डल जिले के सात विकास खंडों मंडी सदर, द्रंग, बल्ह, सुंदरनगर, धनोटू, गोहर तथा करसोग में कार्यरत है। इन मण्डलों द्वारा 11 सरकारी रेशम केंद्रों मंडी, पंडोह, नगवाईं, साहल, ददोह, राजगढ़, डोडर, रिवालसर, सैन्ज, डैहर और ममेल (करसोग) का संचालन किया जाता है। किसानों को उन्नत किस्म के शहतूत पौधे उपलब्ध करवाने के साथ-साथ पौधों की देखभाल, रोग नियंत्रण तथा पत्ती उत्पादन संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है। वहीं संधोल रेशम मंडल धर्मपुर, जोगिंद्रनगर और गोपालपुर क्षेत्रों में रेशम विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है।

रेशम कीट बीज उत्पादन के क्षेत्र में थुनाग स्थित सिल्कवर्म सीड प्रोडक्शन सेंटर विशेष भूमिका निभा रहा है। धरोट में स्थापित क्लस्टर रियरिंग सेंटर के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। केंद्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 650 डीएफएल तक पहुंच चुकी है। बालीचौकी स्थित सेरी एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट एंड इनोवेशन सेंटर (एसईडीआईसी) जिले की पोस्ट-कोकून गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहां रेशम धागा निर्माण, बुनाई, मूल्य संवर्द्धन तथा विपणन संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही हथकरघा बुनकरों एवं कारीगरों को प्रशिक्षण देकर उनकी आय और उत्पादकता में वृद्धि की जा रही है।

आज रेशम उद्योग मंडी जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उत्पादन, प्रसंस्करण, प्रशिक्षण और विपणन की समन्वित व्यवस्था ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है।